गांधी मौखिक-अमौखिक दोनों संचार में सिद्धहस्त थे - डॉ. व्‍यास

महात्‍मा गांधी ने अपने संघर्ष में जनता को शामिल किया। लोगों का साथ हासिल करना कोई आसान काम नहीं था। इसके लिए उन्‍होंने जनसंवाद के उपकरणों का उपयोग किया। वे संवाद के मौखिक और अमौखिक दोनों तरह के संचार में सिद्धहस्‍त थे। भारतीय राष्‍ट्रीय आंदोलन में उन्‍होंने अपने संचार कौशल का प्रभावी उपयोग किया। यह विचार मोहनलाल सुखाडि़या विश्‍वविद्यालय उदयपुर के हिन्‍दी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राजकुमार व्‍यास ने दिनांक 05 जून 2021 को भारतीय विद्या मंदिर संस्‍थान में  संम्‍पन्‍न ‘गांधी और जनसंवाद’ विषयक वेबिनार में व्‍यक्‍त किये। 
डॉ. व्‍यास ने कहा कि गांधी जी ने असहमति को विस्‍तार देने के लिए एक परिपथ का निर्माण किया। हड़ताल, प्रदर्शन, धरना, बहिष्‍कार, सविनय अवज्ञा और हिजरत ये सब उसी परिपथ के अंग हैं और हमारे लोकतांत्रिक जीवन के लिए आवश्‍यक हैं। संस्‍थान की सचिव निर्मला चेलावत ने बताया कि गांधी जी एक मात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोने का काम किया, जिसके बल पर उन्होंने ने अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर किया। कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि‍ गोविंद गुरु जनजातीय विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. आइ.वी. त्रिवेदी ने गांधी जी के जीवन से सीख लेने की प्रेरणा दी। प्रो. त्रिवेदी ने कहा कि गांधी जी ने  गांवों को भारत की आत्‍मा कहा और गांवों के विकास से ही हमारा आर्थिक और सामाजिक विकास संभव हो सकेगा। 
कार्यक्रम में महात्‍मा गांधी जीवन दर्शन समिति के जिला संयोजक रमेश पण्‍डया ने कहा कि गांधी जी ने परधीन देशवासियों को झकझोर कर उन्‍हें  स्‍वाधीनता के यज्ञ के लिए तैयार किया। गांधीजी के विचारों ने नई पीढ़ी में सृजन सृजनात्मकता का विकास किया। जिला सह संयोजक श्री विकेश मेहता ने दुसरो के दुःख दर्द को समझकर मानव सेवा के लिए समर्पण की बात कही । उन्होंने हर व्यक्ति के अंदर गांधी  है और गांधी दर्शन को आत्मसात करने को कहा । संस्थान के अध्यक्ष उद्योगपति जगदीश भम्भानी ने गांधीजी के सम्पूर्ण जीवन से विद्यार्थियों को सीख लेने की बात कहते हुए कहा कि लक्ष्य कितना भी कठिन क्यो ना हो हमें उसको प्राप्त करने के लिए संघर्ष करते रहना चाहिए। कार्यक्रम के आरंभ में नागेन्‍द्र सिंह  विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. क्षेत्रपाल सिंह ने अतिथियों का परिचय दिया। कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अपरा प्रजापत ने किया और शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विशाल उपाध्‍याय ने धन्‍यवाद ज्ञापित किया।

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