निजी प्रतिरक्षा में किये गए कृत्य अपराध नहीं - राठौड़

डा. नागेन्द्र सिंह विधि महाविद्यालय में दिनांक 01/06/2021 को "भारतीय दंड संहिता 1860:सामान्य अपवाद" विषय पर ई- संगोष्ठी (विस्तार व्याख्यान) का आयोजन किया गया । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. एस. एस. राठौड, प्राचार्य, सर प्रताप विधि महाविद्यालय, जोधपुर रहे। डॉ. राठौड़ ने सामान्य अपवादो को मुख्यतः दो श्रेणियों में विभाजित किया। उन्होंने बताया कि प्रथम श्रेणी में धारा 76 से 95 तक के कृत्यों को बताया गया है जिनमें कृत्य करने वाले व्यक्ति का कोई दुराशय नहीं होता है, जिसके कारण इन कृत्यों को अपवादों में सम्मिलित करते हुए अपराध नहीं माना गया है। द्वितीय श्रेणी में धारा 96 से 106 में प्राइवेट प्रतिरक्षा के बारे में बताया गया है जिन्हें हम सामान्यतः सेल्फ डिफेंस भी कहते है। इस श्रेणी में किये गए कृत्यों के लिए व्यक्ति को माफ नहीं किया जाता है बल्कि कुछ आधारों पर उसके द्वारा किये गए कृत्यों को तर्क संगत ठहराया जाता है। इस प्रकार द्वितीय श्रेणी में किया गया कृत्य अपराध तो होता है परंतु उसे अपवाद मान कर व्यक्ति को दंडित नही किया जाता है। 
कार्यक्रम के मुख्य अथिति के रूप में  डॉ. महिपाल सिंह राव, निदेशक, वैद विद्यापीठ, गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बाँसवाड़ा ने वैदिक काल की न्याय व्यवस्था की स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि उस  समय भी समाज मे अपराध और अपराधियों के लिए कोई स्थान नही था। रामायण काल मे माता सीता के हरण के अपराध के लिए रावण को ना केवल सोने की लंका से हाथ धोना पड़ा बल्कि उस सहित पूरी राक्षस जाति का विनाश हो गया। इसी प्रकार महाभारत में द्रौपदी के चीरहरण करने के अपराध में सम्पूर्ण कौरव वंश समाप्त हो गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही संस्था सचिव श्रीमति निर्मला चलावत ने इस समय कोविड की महामारी से बचने का विद्यार्थियों से आह्वान किया व ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि के रूप में भारतीय विद्या मंदिर संस्थान के अध्यक्ष श्री जगदीश चंद्र जी भम्भानी, शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विशाल उपाध्याय भी उपस्थित थे। कार्यक्रम के प्रारम्भ में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. क्षेत्रपाल सिंह चौहान ने प्रारम्भ में अथितियों का स्वागत किया। आभार व्यक्त श्रीमती अपरा प्रजावत ने किया ।कार्यक्रम में विधि महाविद्यालय सहायक आचार्य डॉ. ओम प्रकाश, डॉ. ललित कुमार मीणा, सुमन जैन, योगिता सिकरवार, एडवोकेट शालोम जॉन, एडवोकेट प्रवीण सिंह सोलंकी, राजन सामर तथा विधि महाविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित थे। संचालन डॉ. अंकिता जैन ने किया ।

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